ISRO ने SpaDeX मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च कर अंतरिक्ष में हासिल की एक और बड़ी उपलब्धि

जलज वर्मा

 |  31 Dec 2024 |   250
Culttoday

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने SpaDeX (स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च करके अंतरिक्ष में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह मिशन सोमवार, 30 दिसंबर की रात 10 बजे श्रीहरिकोटा से PSLV-C60 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया। इस मिशन के तहत दो छोटे उपग्रहों को पृथ्वी से 470 किमी की ऊंचाई पर भेजा गया है, जो अंतरिक्ष में डॉकिंग और अनडॉकिंग की प्रक्रिया को अंजाम देंगे।

SpaDeX मिशन का महत्व

  • डॉकिंग और अनडॉकिंग तकनीक:
    यह मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करता है, जो अंतरिक्ष में डॉकिंग और अनडॉकिंग तकनीक में महारत रखते हैं। अब तक यह तकनीक सिर्फ रूस, अमेरिका, और चीन के पास थी।
  • भविष्य के मिशनों की नींव:
    1. चंद्रयान-4 मिशन: चंद्रमा से सैंपल रिटर्न के लिए डॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा।
    2. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन: भारत के भविष्य के स्पेस स्टेशन के मॉड्यूल्स को अंतरिक्ष में जोड़ने के लिए यह तकनीक अहम होगी।
    3. 2040 में मानव चंद्र अभियान: जब भारत चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजेगा और वापस लाएगा, तब इस तकनीक का उपयोग होगा।
  • स्वदेशी तकनीक का विकास:
    ISRO ने इस तकनीक पर पेटेंट प्राप्त कर लिया है। इसे पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है, क्योंकि अन्य देश इस तकनीक को साझा नहीं करते।

डॉकिंग और अनडॉकिंग: आसान भाषा में

  1. स्पेसक्राफ्ट का परिचय:
    • टारगेट: एक स्थिर उपग्रह।
    • चेजर: टारगेट की ओर बढ़ने वाला उपग्रह।
  2. प्रक्रिया:
    • PSLV-C60 रॉकेट से दोनों स्पेसक्राफ्ट को अलग-अलग दिशाओं में लॉन्च किया गया।
    • स्पेसक्राफ्ट्स की गति 28,800 किमी/घंटा तक पहुंचती है।
    • डॉकिंग प्रक्रिया लॉन्च के 10 दिन बाद शुरू होगी।
    • चेजर, टारगेट से धीरे-धीरे दूरी कम करेगा (20 किमी, 5 किमी, 500 मीटर, और अंत में 3 मीटर)
    • अंततः दोनों स्पेसक्राफ्ट को जोड़ा जाएगा, और इलेक्ट्रिकल पावर ट्रांसफर किया जाएगा।

ऐतिहासिक संदर्भ

  • पहली डॉकिंग:
    • अमेरिका: 16 मार्च 1966
    • सोवियत संघ: 30 अक्टूबर 1967
    • चीन: 2 नवंबर 2011

SpaDeX के जरिए भारत ने इस सूची में अपना स्थान बना लिया है।

SpaDeX की सफलता के मायने

ISRO का यह मिशन न केवल तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक नई दिशा देता है। यह मिशन भविष्य के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों की नींव रखता है, जो भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

भारत ने इस मिशन के जरिए यह दिखा दिया है कि आत्मनिर्भर तकनीक के दम पर वह किसी भी चुनौती को पार कर सकता है। SpaDeX न केवल भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रतीक है, बल्कि यह भविष्य की अंतरिक्ष खोजों का मार्ग भी प्रशस्त करता है।


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