यूरोप के दूसरे सबसे बड़े आर्थिक महाद्वीप फ्रांस के राजनीतिक और सामाजिक मोर्चे से आज की सबसे वीभत्स और सनसनीखेज खबर आई है। देश में गहराते बजटीय घाटे, रिकॉर्ड राष्ट्रीय कर्ज और संसद में जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच फ्रांस की सड़कों पर जनाक्रोश की एक विशाल ज्वाला भड़क उठी है। देश की सभी प्रमुख सार्वजनिक और निजी श्रम यूनियनों ने सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रस्तावित वित्तीय कटौती के खिलाफ अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया है, जिसमें उग्र 'येलो वेस्ट' (Yellow Vest) आंदोलन के तेवर एक बार फिर से लौट आए हैं।
राजधानी पेरिस सहित लियोन, मार्सेली और बोर्डो जैसे प्रमुख फ्रांसीसी शहरों में लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। पेरिस की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और दंगा रोधी पुलिस (CRS) के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं, जहाँ पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख वित्तीय जिलों और सरकारी भवनों के बाहर बैरिकेड्स जलाकर और नारेबाजी करके पूरे यातायात और जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया है।
फ्रांसीसी सरकार द्वारा पेश किए गए नए आपातकालीन बजट में पेंशन सुधारों, स्वास्थ्य सेवाओं के बजट में कटौती और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगाने जैसे कठोर कदम उठाए गए हैं। सरकार का तर्क है कि देश को यूरोपीय संघ (EU) के 3% घाटे के मानक पर लाने के लिए ये कड़े फैसले जरूरी हैं, लेकिन आम नागरिकों और यूनियनों का कहना है कि सरकार आम जनता पर टैक्स का बोझ डालकर देश के अमीर कॉर्पोरेट्स को रियायतें दे रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस भीषण आंतरिक अशांति का सीधा प्रभाव पूरे यूरोपीय संघ (EU) की अर्थव्यवस्था और यूरो (Euro) मुद्रा की विनिमय दर पर पड़ना शुरू हो गया है। फ्रांस में हवाई यात्राएं, ट्रेन सेवाएं और बंदरगाहों पर कामकाज ठप होने से पूरे यूरोप में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि फ्रांस सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच जल्द ही कोई बीच का रास्ता नहीं निकला, तो यह संकट पूरे यूरो-ज़ोन को एक गहरी आर्थिक मंदी की ओर धकेल सकता है।
यह उग्र जनआंदोलन यह दर्शाता है कि 21वीं सदी के यूरोप में आर्थिक सुधारों को जबरन थोप पाना अब किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं रह गया है। फ्रांस का यह वित्तीय और सामाजिक संकट यह चेतावनी देता है कि जन-कल्याण और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए बिना कोई भी देश स्थिरता हासिल नहीं कर सकता। फ्रांस की सड़कों पर भड़की यह आग आने वाले दिनों में पूरे यूरोपीय महाद्वीप के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करने वाली है।
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