गौ-संरक्षण, सड़क सुरक्षा और स्वदेशी अर्थव्यवस्था पर विमर्श

जलज वर्मा

 |  16 Jan 2026 |   369
Culttoday

राष्ट्रीय गौधन महासंघ के तत्वावधान में राजधानी दिल्ली के हौजखास स्थित ‘काउज़ोन’ परिसर में काउज़ोन–काउ डंग ब्रिकेटिंग मशीन तथा रेडियम बेल्ट के अनावरण को लेकर आयोजित आवश्यक बैठक में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री श्री एस.पी. सिंह बघेल ने गौ-संरक्षण को मानव सुरक्षा, किसान हित और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ते हुए इसे समय की अनिवार्य आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि गौ-संरक्षण आज केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा गंभीर सरोकार बन चुका है। 

श्री बघेल ने कहा कि एक्सप्रेस-वे और हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाएं चिंताजनक स्तर पर पहुंच रही हैं। “अंधेरे, कोहरे और बरसात के मौसम में सड़क पर बैठी काली गायें लगभग अदृश्य हो जाती हैं। रेडियम बेल्ट जैसी पहल इन दुर्घटनाओं को रोकने का एक ठोस और व्यावहारिक समाधान है, जिससे पशुधन के साथ-साथ मानव जीवन की भी रक्षा हो सकती है। 

काउ डंग ब्रिकेटिंग मशीन को गौ-आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए मंत्री ने कहा कि गोबर से ईंधन और ऊर्जा का उत्पादन पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ-संरक्षण के लाभ तत्काल आंकड़ों में भले न दिखें, लेकिन इसके सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय परिणाम दीर्घकालिक और व्यापक हैं। 

राष्ट्रीय गौधन महासंघ के मुख्य संयोजक विजय खुराना ने बताया कि पहले जहां लगभग 9.5 लाख टन गोबर सड़कों और नालियों में बहकर नष्ट हो जाता था, आज वही गोबर पर्यावरण-संवेदनशील ईंधन में परिवर्तित होकर लाखों पेड़ों की कटाई रोकने में सहायक बन रहा है। उन्होंने कहा कि देशभर में सक्रिय 22,000 से अधिक गौशालाएं जैविक खेती, पंचगव्य औषधियों और गोबर-आधारित उत्पादों के जरिए 20 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं। 

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री श्री बजरंग लाल बागड़ा ने कहा कि विहिप बीते कई दशकों से सांसद संपर्क जैसे अभियानों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों के बीच गौ-संरक्षण और गौ-आधारित विकास के विषय को निरंतर उठा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि गौ-आधारित औषधियों पर केंद्रित अनुसंधान केंद्रों के पास कई पेटेंट हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि गौ-संरक्षण केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और नवाचार से जुड़ा क्षेत्र है। 

संस्था की संयोजक एवं पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल ने कहा कि “कृष्ण की गाय और शिव के नंदी की रक्षा के बिना भारत का सर्वांगीण कल्याण संभव नहीं है।” उन्होंने गौसेवा को राष्ट्रसेवा का सशक्त माध्यम बताया और कहा कि दौरान देशभर की गौशालाएं आत्मनिर्भरता के विविध मॉडल प्रस्तुत करेंगी। 

कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेविका समिति की प्रांत संचालिका डॉ. चारु कालरा और पूर्व आईएएस अधिकारी एन.सी. वाधवा पूर्व विधायक मदन लाल समेत अन्य गणमान्य लोग  उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य गौ-संरक्षण, किसान सुरक्षा और नवाचार आधारित समाधानों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाना रहा। 


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