बारूद की कूटनीति पर मोदी -नेतन्याहू संवाद

श्रीराजेश

 |  07 Aug 2026 |   38
Culttoday

बारूद के ढेर पर कूटनीति का संतुलन: पीएम मोदी और नेतन्याहू के संवाद के गहरे मायने

जब पश्चिम एशिया गाज़ा, लेबनान, ईरान और लाल सागर के अशांत जलक्षेत्र में गहराते सैन्य तनाव के कारण एक भीषण वैश्विक संकट और महायुद्ध के मुहाने पर खड़ा है, तब भारत के प्रधानमंत्री द्वारा इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर की गई विस्तृत वार्ता केवल एक सामान्य कूटनीतिक औपचारिकता या औपचारिकता-मात्र संवाद नहीं, बल्कि एक सुविचारित, बहुआयामी और सामरिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण पहल है। इस दूरभाषीय संवाद के माध्यम से भारत ने वैश्विक पटल पर यह अत्यंत स्पष्ट और सशक्त संदेश रेखांकित कर दिया है कि आतंकवाद के विरुद्ध इज़राइल की बुनियादी सुरक्षा चिंताओं और उसकी संप्रभुता का समर्थन करने के साथ-साथ वह युद्धक्षेत्र में फँसे निर्दोष आम नागरिकों की सुरक्षा, आपातकालीन मानवीय सहायता की निर्बाध पहुँच और बंधकों की सुरक्षित रिहाई के साथ तत्काल शांति बहाली को सर्वोपरि मानता है।

विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो यह उच्च-स्तरीय वार्ता भारत की ऐतिहासिक 'सामरिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) और बहु-ध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में अत्यंत जटिल संतुलन साधने की परिपक्व क्षमता को उजागर करती है; क्योंकि पश्चिम एशिया में निरंतर बढ़ता हुआ यह अभूतपूर्व सैन्य तनाव केवल इज़राइल, ईरान या अरब देशों का कोई स्थानीय व आंतरिक मामला भर नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा और घातक असर भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, स्वेज नहर से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही और खाड़ी क्षेत्र में निवास करने वाले तथा भारत की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले 90 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा व जीवन से सीधा जुड़ा हुआ है।

इसके अतिरिक्त, 'I2U2' (भारत, इज़राइल, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात) तथा महत्वाकांक्षी 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) जैसे विशाल भू-राजनीतिक एवं ढांचागत प्रोजेक्ट्स का भविष्य और सफलता भी पूरी तरह से इसी संपूर्ण क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता और शांति पर टिकी हुई है। रक्षा उत्पादन, उन्नत सैन्य तकनीक, साइबर सुरक्षा, जल प्रबंधन और कृषि अनुसंधान के क्षेत्रों में इज़राइल के साथ प्रगाढ़ व अटूट द्विपक्षीय संबंधों को निरंतर मज़बूत बनाए रखते हुए, अपने पारंपरिक मित्र अरब जगत और ईरान के साथ अपने गहरे आर्थिक व कूटनीतिक हितों को कुशलतापूर्वक साधे रखना भारत की स्वतंत्र और सूक्ष्म विदेश नीति की एक बड़ी विजय को दर्शाता है।

अतः, प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुआ यह सामरिक संवाद दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देता है कि आज के अत्यधिक अंतर-निर्भर और तकनीक-संचालित युग में किसी भी जटिल से जटिल समस्या का स्थाई व सर्वमान्य समाधान बारूद के धुएँ और युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि केवल और केवल संयम, रचनात्मक संवाद, मानवीय संवेदना और कूटनीतिक मेज़ पर ही संभव है, जहाँ भारत एक ज़िम्मेदार वैश्विक शक्ति और शांतिदूत के रूप में अपनी सर्वव्यापी भूमिका को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा है।


RECENT NEWS

NEP 2020: शोध, संस्कृति और नवाचार की नई उड़ान
कल्ट करंट डेस्क |  08 Aug 2026  |  28
To contribute an article to CULT CURRENT or enquire about us, please write to cultcurrent@gmail.com . If you want to comment on an article, please post your comment on the relevant story page.
All content © Cult Current, unless otherwise noted or attributed. CULT CURRENT is published by the URJAS MEDIA VENTURE, this is registered under UDHYOG AADHAR-UDYAM-WB-14-0119166 (Govt. of India)