अब आगे क्या ? (आवरण कथा)

संतु दास

 |  01 May 2025 |   164
Culttoday

भारत की प्रतिक्रिया बहुआयामी होने की संभावना है, जिसमें कूटनीतिक और सैन्य दोनों विकल्प शामिल हैं। एक ओर, पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने और उसकी छवि धूमिल करने के प्रयास तेज किए जाएंगे। दूसरी ओर, सीमित और लक्षित सैन्य कार्रवाई के जरिए पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि भारत अब किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा।
अजीत डोवाल के नेतृत्व में, भारत की कूटनीतिक रणनीति 'बयानबाजी' तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे पाकिस्तान पर दबाव बनाने के एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इस रणनीति के केंद्र में निम्नलिखित बिंदु होंगे: अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करना: एफएटीएफ (वित्तीय कार्रवाई कार्यदल) के समक्ष पाकिस्तान को 'ब्लैकलिस्ट' कराने के प्रयास तेज किए जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से सीधे जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंधों को बढ़ाने के प्रस्तावों को बढ़ावा दिया जाएगा। जी20, एससीओ और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजक देश घोषित करने के लिए वैश्विक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। प्रमुख देशों के साथ गहन वार्ता: अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और अन्य प्रमुख देशों के साथ घनिष्ठ वार्ताएं आयोजित की जाएंगी ताकि पाकिस्तान को सैन्य सहायता या वित्तीय रियायतें देने के किसी भी प्रयास को रोका जा सके। क्षेत्रीय संबंधों का उपयोग: अरब देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों का उपयोग करके पाकिस्तान के पारंपरिक समर्थन आधार को कमजोर किया जाएगा।
डोवाल का कूटनीतिक दृष्टिकोण 'नाम दो, सबूत दो, और दुनिया को बताओ' के सिद्धांत पर आधारित है। यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों और राजनीतिक अलगाव को हथियार बनाकर पाकिस्तान पर निरंतर दबाव बनाए रखने का लक्ष्य रखती है।
हालांकि कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे, भारत सैन्य स्तर पर चुप नहीं बैठेगा। अतीत के अनुभवों (2016 सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक) के आधार पर, पहलगाम हमले के जवाब में भारत के पास कई विकल्प खुले हैं: सर्जिकल स्ट्राइक 2.0: एलओसी पार कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी लॉन्च पैड्स और प्रशिक्षण शिविरों पर लक्षित हमले। स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक: भारतीय वायुसेना द्वारा सीमा पार से सीमित हवाई हमले, विशेष रूप से आतंकवादी शिविरों और लॉन्चिंग साइट्स पर। स्पेशल फोर्सेज मिशन: कमांडो आधारित गुप्त अभियान, जिनमें गहरी पैठ बनाकर आतंकवादी नेटवर्क को नष्ट किया जाए। ड्रोन स्ट्राइक: सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान द्वारा स्थापित आतंकवादी लॉजिस्टिक्स को ड्रोन द्वारा निशाना बनाना, जिससे सीधा संघर्ष टाला जा सके, पर प्रभावी संदेश भेजा जा सके। एलओसी पर बढ़ा हुआ दबाव: सीमाओं पर सैन्य दबाव बढ़ाना, लगातार फायरिंग और घुसपैठ रोधी अभियानों को तेज करना, जिससे पाकिस्तानी सेना को आतंकवादी गतिविधियों के समर्थन की कीमत चुकानी पड़े।
इन सैन्य विकल्पों में से प्रत्येक के अपने जोखिम और लाभ हैं। भारत एक सावधानीपूर्वक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगा, जो जवाबी कार्रवाई को सटीक, लक्षित और सीमित रखने के साथ-साथ पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देगा कि किसी भी भविष्य के हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अजीत डोवाल, जिन्हें भारत के सबसे प्रभावशाली सुरक्षा रणनीतिकारों में गिना जाता है, इस पूरे परिदृश्य के केंद्र में हैं। उनकी भूमिका कई स्तरों पर अहम होगी: खुफिया समन्वय: डोवाल सुनिश्चित करेंगे कि रॉ, इंटेलिजेंस ब्यूरो, मिलिट्री इंटेलिजेंस और अन्य एजेंसियों से आने वाली सूचनाओं का तेजी से समन्वय किया जाए। उनकी शैली 'एक्शनेबल इंटेलिजेंस' पर तत्काल कदम उठाने की है, न कि केवल रिपोर्ट तैयार करने की। प्रधानमंत्री को मार्गदर्शन: डोवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी सुरक्षा सलाहकार हैं। वे संभावित सैन्य विकल्पों (सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक या ड्रोन ऑपरेशन) के जोखिम और लाभ का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे, और प्रधानमंत्री को स्थिति के अनुसार सर्वश्रेष्ठ निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शन देंगे। साइबर प्रतिरोध: डोवाल के तहत भारत साइबर मोर्चे पर भी पाकिस्तान के आतंकवादी नेटवर्क और फेक न्यूज़ फैक्ट्रियों को निशाना बनाने के लिए साइबर ऑपरेशन शुरू कर सकता है। कश्मीर में संकट प्रबंधन: कश्मीर घाटी में संभावित आंतरिक उथल-पुथल के लिए डोवाल राज्य पुलिस, अर्धसैनिक बलों और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर संकट प्रबंधन करेंगे। नागरिकों के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए 'Winning Hearts and Minds' कार्यक्रमों को फिर सक्रिय किया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय कथा का निर्माण: डोवाल के निर्देश पर भारतीय मिशनों और प्रवक्ताओं को एक सुसंगत कथा देने का काम होगा कि भारत एक पीड़ित राष्ट्र है, और पाकिस्तान एक आक्रामक आतंक-प्रेरित राज्य। यह कथा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भारत के लिए सहानुभूति और समर्थन जुटाएगी।
पहलगाम हमले ने भारत को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। 'सब्र' की रणनीति की अब सीमाएँ दिखने लगी हैं। डोवाल के मार्गदर्शन में भारत एक ऐसी रणनीति अपनाएगा जो संतुलित होगी, जिसमें कूटनीतिक दबाव और सीमित सैन्य कार्रवाई का मिश्रण होगा।
डोवाल की कार्यशैली के अनुसार, प्रतिक्रिया ऐसी होगी — 'कम शब्द, ज्यादा एक्शन।'
इस बार भारत की कार्रवाई तीखी, सटीक और चौंकाने वाली होगी। पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि भारत अब किसी भी हमले की कीमत वसूलेगा।
 


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