भर रहा सरकारी खजाना, छलक रहे महंगे जाम

संदीप कुमार

 |  07 May 2020 |   209
Culttoday

केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन के तीसरे चरण में प्रतिबंधों में ढील देने के बाद, कई राज्यों में शराब की दुकानें खुल गयीं और शराब खरीदने वालों की लम्बी कतारें नज़र आयीं. सोशल डिस्टेंसिंग को हासिए पर रखा गया. लेकिन राज्य सरकारों ने शराब की बिक्री पर रोक नहीं लगायी बल्कि देश के कई राज्यों में शराब की बिक्री की अनुमति दी गई, तो कई राज्यों में शराब की होम डिलीवरी करने की भी बात की गई.

दरअसल, लॉकडाउन की वजह से हर जगह आर्थिक गतिविधियां ठप है और इससे सरकारों के राजस्व पर प्रभाव तो पड़ ही रहा है और इस घाटे की कुछ भी भरपायी हो जाए, यहीं सोच कर राज्य सरकारें शराब की बिक्री को धड़ाधड़ अनुमति दे रही हैं. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और राजस्थान समेत कई राज्यों ने शराब की बिक्री की अनुमति दी है. असम में शराब की दुकानें खुली है. कई राज्यों ने शराब पर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया था और अब शराब की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. दिल्ली सरकार ने बीते सोमवार की शाम को ही शराब की बिक्री पर एक विशेष कोरोना शुल्क लगाया जिसके बाद से कीमतों में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई. आंध्र प्रदेश ने जल्द ही दिल्ली की तरह उत्पाद शुल्क में वृद्धि की जिस से शराब की कीमत में 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गयी. पश्चिम बंगाल में, 30 प्रतिशत की वृद्धि की गई, जबकि राजस्थान में, शराब 10 प्रतिशत अधिक महंगी हो गयी.

कोरोनावायरस महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन के कारण संसाधनों की भारी कमी को देखते हुए यह बढ़ोतरी कोई नयी बात नहीं है. शराब से मिलने वाले कर का राज्यों की आय में दूसरा या तीसरा सबसे बड़ा योगदान होता है. राज्य पिछले दो दिनों में शराब की बिक्री से काफी कमाई कर रहे हैं. असम ने कथित तौर पर शराब की बिक्री में मंगलवार तक 50 करोड़ रुपये की कमाई की. आंध्र प्रदेश ने शराब की दुकानें खोलने के पहले दिन करीब 40 करोड़ रुपये राजस्व के तौर पर प्राप्त किये.

दूसरी ओर, कर्नाटक ने सोमवार को 45 करोड़ रुपये और मंगलवार को 197 करोड़ रुपये कमाए. इससे पहले राज्य में एक दिन में करीब 54 करोड़ रुपये की कमाई होती थी. कर्नाटक सरकार शराब पर अतिरिक्त 5 से 15 फीसदी कोविड कर लगाने की भी योजना बना रही है. राजस्थान ने पिछले सप्ताह भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) पर उत्पाद शुल्क 35 प्रतिशत और अन्य शराब श्रेणियों में 45 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था. लॉकडाउन के कारण राज्य को प्रति दिन 41 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, लेकिन इस कर की वजह से अब 15,000 करोड़ रुपये के सामान्य राजस्व के अलावा 800 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है.

पश्चिम बंगाल में, उत्पाद शुल्क में वृद्धि से कुल राजस्व में 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आने की उम्मीद है. पिछले साल राज्य ने शराब की बिक्री से 11,627 करोड़ कमाए थे. उत्तर प्रदेश ने भी विभिन्न प्रकार की शराब के आधार पर शराब की कीमत में वृद्धि की घोषणा की है- 180 मिलीलीटर की बोतल के ऊपर 10 रुपये बढ़ाए जाएंगे जबकि प्रीमियम शराब की बोतल की कीमत में 50 रुपये की वृद्धि होगी.

हालांकि शराब की कीमतों में वृद्धि किये जाने के बावजूद शराब के शौकीनों पर इसका कोई मलाल नहीं दिख रहा, बल्कि शराब के ठेकों में लोगों की लंबी-लंबी लाइने लगी हुई है. तो अब इन शौकीनों के जाम अधिक महंगे हो गये हैं.

राज्य के आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि 70-80 करोड़ रुपये के दैनिक औसत के मुकाबले सोमवार को 100 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई. छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि नहीं की है, हालांकि लोगों के घर तक शराब पहुंचाने के लिए एक नया पोर्टल बनाया है.

इस बीच हरियाणा ने भी बुधवार से शराब पर कोरोना-कर लगाने का फैसला किया है. भारत में निर्मित शराब 50 रुपये तक महंगी होगी और ब्रांड के आधार पर 2 रुपये से 50 रुपये तक का अतिरिक्त कर लगाया जाएगा. दूसरी ओर, पंजाब में भी जल्द ही शराब पर विशेष कोरोना शुल्क की घोषणा करने की संभावना है.


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